
सेंटर फॉर ऑरबिटल एंड रीइंट्री डेबरीज स्टडीज ने खबर दी है कि अगले 48 घंटों के भीतर अंतरिक्ष मलबे के दो बड़े टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं। इनमें से एक है 2000 किलोग्राम वजनी सेंटॉर रॉकेट का बेकार हिस्सा और दूसरा है 2500 किलोग्राम वजनी डेल्टा-3 रॉकेट का एक बेकार हिस्सा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सेंटॉर रॉकेट का मलबा 3 फरवरी को और डेल्टा-2 रॉकेट का मलबा 4 फरवरी को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहा है। पृथ्वी के तीन-चौथाई हिस्से में पानी है इसलिए हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है, उम्मीद है कि अंतरिक्ष से आ रहा ये मलबा समंदर में ही कहीं आ गिरेगा। लेकिन फिरभी वैज्ञानिक ग्राउंड ट्रैकिंग सिस्टम से इस गिरते हुए मलबे पर निगाहें जमाए हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर गिर रहे इन मलबों से घबराने की जरूरत इसलिए भी नहीं है, क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश करते ही ये धधक उठेगें और इनका ज्यादातर हिस्सा या तो भाप बनकर उड़ जाएगा...या फिर ये भी हो सकता है कि एक धमाके के साथ ये कई टुकड़ों में बंट जाए।
Accha pryas kar rahe hain aap. Shubhkaamnayein.
जवाब देंहटाएंसाइंस की खबरों का हिंदी में ब्लॉग शुरू करने की इस कोशिश को आप सबका प्रोत्साहन मिला, इसके लिए आभार। इस बलॉग में हर दिन आपको एक नई खबर मिले, ये मेरी कोशिश रहेगी। ई-गुरू राजीव आपके सुझाव पर अमल कर लिया है, मुझे ऐसे सुझावों की जरूरत है, उम्मीद है कि गुरुज्ञान मिलता रहेगा।
जवाब देंहटाएंउत्तम! ब्लाग जगत में पूरे उत्साह के साथ आपका स्वागत है। आपके शब्दों का सागर हमें हमेशा जोड़े रखेगा। कहते हैं, दो लोगों की मुलाकात बेवजह नहीं होती। मुलाकात आपकी और हमारी। मुलाकात यहां ब्लॉगर्स की। मुलाकात विचारों की, सब जुड़े हुए हैं।
जवाब देंहटाएंनियमित लिखें। बेहतर लिखें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। मिलते रहेंगे।
दोस्तों, तकनीकी दिक्कतों से मैं अब अपने ही इस ब्लॉग को अपडेट नहीं कर पा रहा हूं। मेरी कोशिश जारी है, लेकिन अगर कामयाबी नहीं मिलती तो मुझे एक नया ब्लॉग बनाना पड़ेगा। हर स्थिति में आपको सूचना जरूर दूंगा
जवाब देंहटाएंok savdhan ho gaye. narayan naraayn
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